नई दिल्ली, 15 नवंबर: डायबिटीज एक गंभीर बीमारी बन चुकी है, और देश में इसके मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारत में लगभग 13 करोड़ डायबिटीज मरीज अपना इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। यह संख्या मामूली नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति गंभीर सवाल खड़े करती है। लांसेट मेडिकल जर्नल के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में करीब 44 करोड़ लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं। इस बीच, 13 करोड़ मरीजों का इलाज न करवा पाना कई कारणों पर सवाल उठाता है—क्या यह गरीबी है, या चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच की कमी?
इस बीमारी का मुख्य कारण खराब जीवनशैली, मोटापा, और अधिक कार्बोहाइड्रेट और शक्कर युक्त भोजन है। हालांकि ग्रामीण इलाकों में भी डायबिटीज का स्तर बढ़ रहा है, लेकिन जागरूकता और सुविधाओं की कमी इसे और जटिल बना रही है।
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भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या 44 करोड़ पार, इलाज में असमानता बढ़ी
इलाज न करवाने के कारण और संभावित प्रभाव
डायबिटीज के मरीजों को अक्सर अन्य बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है। इलाज न हो पाने के कारण ये मरीज लीवर और हृदय संबंधी समस्याओं जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के शिकार हो जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि हर डॉक्टर के लिए सभी मरीजों की समस्याएं ध्यान से सुन पाना संभव नहीं है।
भारत में चिकित्सा सुविधा की असमानता
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव और शहरी क्षेत्रों में इलाज के खर्च की बढ़ती लागत इस बीमारी के प्रबंधन में मुश्किलें खड़ी करती है। इस समस्या के समाधान के लिए जरूरत है कि डायबिटीज के प्रति जागरूकता फैलाकर लोग उचित चिकित्सा पद्धति अपनाएं और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उपचार कराएं।
लाइफस्टाइल में बदलाव से बढ़ रही समस्या
1990 के बाद से भारत में डायबिटीज के मामलों में दोगुना वृद्धि हुई है। शारीरिक श्रम की कमी और उच्च कैलोरी वाले आहार की वजह से मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज का प्रसार हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 50 साल से अधिक उम्र के आधे से अधिक लोग डायबिटीज से ग्रसित हैं, जिसमें पुरुषों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।
अंधविश्वास और झूठी उम्मीदों का असर
डायबिटीज के मरीजों में अक्सर इलाज के प्रति अंधविश्वास देखा गया है। इलाज के विकल्प न होने की स्थिति में वे बाबा, योगा गुरु और प्राकृतिक चिकित्सा की ओर भी रुख करते हैं। इससे बीमारी की स्थिति और बिगड़ सकती है। कई बार मरीज इंटरनेट से जानकारी लेकर खुद डॉक्टर बनने की कोशिश करते हैं, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है।
जरूरत है जागरूकता की
सरकार और समाज को मिलकर डायबिटीज के प्रति जागरूकता फैलानी होगी। इलाज में देरी और अंधविश्वास से दूर रहना, समय पर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाना ही इसका हल है।
डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के कुछ आसान तरीके इस प्रकार हैं:
- स्मार्ट डाइट चॉइसेज:
- कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन कम करें, विशेष रूप से ऐसे खाद्य पदार्थ जो जल्दी शुगर में बदल जाते हैं, जैसे कि सफेद चावल और मैदा।
- फाइबर से भरपूर अनाज, जैसे बाजरा, जौ, रागी, और राजमा को शामिल करें। इनसे शुगर धीरे-धीरे रिलीज होती है।
- खाना बनाने में रिफाइंड ऑयल की जगह कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल, जैसे ऑलिव ऑयल या सरसों तेल का उपयोग करें।
- आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का प्रयोग:
- मेथी के बीज और आंवला का सेवन करें, ये ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मददगार होते हैं।
- हल्दी, करेला, जामुन, और नीम जैसी आयुर्वेदिक हर्ब्स का प्रयोग करें, जो प्राकृतिक रूप से ब्लड शुगर को नियंत्रित करती हैं।
- फिजिकल एक्टिविटी और वेट मैनेजमेंट:
- रोजाना कम से कम 30 मिनट का व्यायाम करें, जैसे तेज चलना, योग, या डांस।
- वजन को नियंत्रित रखना डायबिटीज को नियंत्रण में रखने के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए संतुलित भोजन के साथ नियमित व्यायाम पर ध्यान दें।
इन सुझावों का पालन करने से डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है और स्वस्थ जीवनशैली को बनाए रखने में सहायता मिलती है।
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